यह रही एक मजेदार और भावनात्मक कहानी, जो Mount Abu की यात्रा पर आधारित है – एक दोस्ती, रोमांच और यादों से भरी कहानी:
"दोस्ती की वादियों में - माउंट आबू यात्रा"
सालों बाद हमारी स्कूल की पुरानी यारों की टोली एक बार फिर से जुड़ी – विकास, श्रुति, आरव, पूजा और मैं (अभय)। हम सबने तय किया कि इस बार कोई खास जगह घूमा जाए – जहां शांति हो, पहाड़ हो, झीलें हों और दोस्ती की गर्मी ठंडी हवाओं से टकराए।
Mount Abu का नाम आया तो सबकी आंखें चमक उठीं।
Day 1 – सफर की शुरुआत
हमने रात को अहमदाबाद से ट्रेन पकड़ी। स्टेशन पर ही मस्ती शुरू हो गई – गर्मागरम समोसे, चाय और पुराने किस्सों की बौछार। ट्रेन के डिब्बे में हम जैसे ही बैठे, गिटार निकला और श्रुति ने पुराने गानों की धुन छेड़ दी – पूरा डिब्बा झूम उठा।
Day 2 – नक्की झील और सनसेट पॉइंट
सुबह माउंट आबू पहुंचते ही ठंडी हवा ने स्वागत किया। होटल में थोड़ी देर आराम करने के बाद हम सीधे नक्की झील पहुंचे। नाव में बैठकर झील की शांति ने सबके मन को छू लिया।
शाम को सनसेट पॉइंट से सूरज को डूबते देखना किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। पूजा ने कहा – "इस पल को फ्रीज़ कर दो!" और हमने कैमरे में नहीं, दिलों में उसे कैद कर लिया।
Day 3 – दिलवाड़ा मंदिर और गुरु शिखर
अगले दिन दिलवाड़ा मंदिर की कलाकारी देखकर हम सब दंग रह गए। सफेद संगमरमर में छुपी सादगी और भव्यता ने मन मोह लिया।
दोपहर में हम पहुंचे गुरु शिखर – सबसे ऊंची चोटी पर। वहाँ से दिखता पूरा माउंट आबू ऐसा लग रहा था मानो बादलों के बीच में एक जादुई दुनिया हो।
आखिरी रात – अलाव और बातें
रात को होटल की छत पर अलाव जलाया गया। चारों तरफ सितारे, हाथ में कॉफी और दोस्तों की हंसी – यही तो असली जीवन है।
आरव ने अचानक कहा – "हम फिर कब मिलेंगे?"
मैंने मुस्कुराकर कहा – "जब भी दिल कहे, हम फिर माउंट आबू आ जाएंगे।"
सीख और यादें:
यह यात्रा सिर्फ घूमने की नहीं थी, ये थी उन रिश्तों को दोबारा जीने की जो समय की धूल से थोड़े धुंधले हो गए थे। माउंट आबू ने हमें फिर से जोड़ दिया – दिल से।
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HALO ₹ FARVA
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